Thursday, February 13, 2020

बाल विवाह इसके दुष्परिणाम और रोकने के उपाय


बाल विवाह इसके दुष्परिणाम और रोकने के उपाय
अवयस्क कन्याओं का कम उम्र यानी 10 से 18 वर्ष के मध्य विवाह करना बाल विवाह है प्राचीन भारतीय संस्कृति में इसी प्रकार के विवाह का प्रचलन अधिक था तथा इसके पक्ष में या तर्क दिया जाता था कि कम उम्र में विवाह करने से लड़की ससुराल को अपना घर समझकर सभी से इसने करती है तथा अपने कर्तव्यों की भलीभांति निर्वाह करती है प्राचीन काल में विदेशी जातियों के आक्रमण के कारण भी बाल विवाह का प्रचलन हुआ किंतु बचपन में किए गए विवाह प्राया बेमेल विवाह होते थे।


वैसे भी होगा कभी कभी कम उम्र की लड़की तथा अधिक उम्र के लड़के से ब्याह दी जाती थी जिससे दोनों के विचारों में ₹1 की कमी देखी जा सकती थी बालिकाएं प्रायः अशिक्षित रह जाती थी पर्दा प्रथा निरक्षरता उनके विकास में बाधक बन जाते थे वास्तव में कम उम्र में मन कन्याओं का विवाह करने से उनकी शारीरिक स्थिति सोचनीय हो जाती है।

कम उम्र में प्रसूति के कारण कभी-कभी उनकी मृत्यु भी हो जाती है उनका शारीरिक विकास रुक जाता है तथा वे विभिन्न रोगों के शिकार हो जाती है मानसिक दृष्टि से भी अपरिपक्व होने के कारण वे गृहस्थी का भार ढूंढने में असमर्थ रहती हैं बाल विवाह उनके लिए अभिशाप बन जाता है कभी कभी भी इससे त्रस्त होकर आत्महत्या की ओर प्रवृत्त हो जाती है अनमेल विवाह में उन्हें गलत रास्तों पर भी कभी-कभी ले जाता है।

भारत में बाल विवाह को गैरकानूनी माना गया है इसे रद्द करने का भी प्रावधान है बशर्ते वर-वधू में से कोई बालिक आया बालक वयस्क होने पर इसके लिए जिला न्यायालय में अपील करें यदि याचिकाकर्ता आवेश का है तो अपने अभिभावक या मित्र के जरिए बाल विवाह रोकथाम के लिए अधिकारी के समक्ष याचिका दायर कर सकता है यह याचिका बालिका के विवाह होने के दो साल बाद तक दाखिल की जा सकती है।
बाल विवाह को खारिज करने की याचिका दाखिल होने की स्थिति में बालिका को गुजारा भत्ता देने का प्रावधान है जब तक कि उसका पुनर्विवाह ना हो जाए अगर बालिका विवाह रद्द करने की अपील करती है तो उसे आवास मुहैया कराने का प्रावधान है।

बाल विवाह की सजा बढ़ाकर 2 वर्ष और अधिकतम जमाना ₹100000 की गई है बच्चों को खरीदकर कराई गई विवाह खारिज कर दी जाएगी इस विवाह को करवाने वाले परिवार को ₹500 जुर्माना देना पड़ता है और 3 महीने कारावास की सजा होती है।

विवाह समारोह में शामिल होने वालों को भी किसी भी सजा का प्रावधान नहीं है इस हेतु बाल विवाह नियंत्रण कानून 1929 व बाल विवाह रोकथाम विधेयक 2004 बना बाल विवाह के मामले की सुनवाई जिला न्यायालय में होती है इसके लिए अलग से विशेष अदालत का प्रावधान नहीं है।
बाल विवाह के दुष्परिणाम

1.अभ्यास कब बालिका का विवाह होने पर या पति की मृत्यु होने पर उसे वैधव्य भोगना पड़ता है समाज में मान-सम्मान प्राप्त नहीं होता।

2. वयस्क होने पर आपसी कसामंजस्य के कारण तलाक की नौबत आ जाती है।

बाल विवाह के उपचार

छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग द्वारा बाल विवाह की रोकथाम के लिए अक्षय तृतीया के पूर्व सभी जिलाधीश एवं पुलिस अधीक्षकों को बाल विवाह की रोकथाम हेतु विधि के अनुसार पत्र प्रेषित किए जाते हैं जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की छाया प्रति भी भेजी जाती है जिसे वे स्वयं स्फूर्त होकर कार्य कर सकें।

दहेज निषेध Dowry Prohibition

दहेज प्रथा भारतीय समाज के लिए अभिशाप है दहेज कन्या के अभिभावक संपत्ति या उपहार के रूप में कन्या और वर को देते हैं दहेज का तात्पर्य उस संपत्ति से है या उन्हें बहारों से है जो कन्याओं को उनके बाल विवाह के समय दिया जाता है जब वह अपने पिता के घर को से विदा होकर बचके गिरी के लिए प्रस्थान करती हैं दहेज एक गंभीर सामाजिक बुराई है जिसका परिणीति आत्महत्या और मौजूदा हमें होती है वास्तव में देखा जाए तो हम भारत में दहेज के कारण होने वाली हत्या और आत्महत्या गहरी चिंता का विषय बन गई है पहले करते थे इसका स्वरूप बदल गया है।

वर पक्ष सौदेबाजी करता है लड़की की शिक्षा नौकरी और सामाजिक स्थिति के अनुसार दहेज दिया जाता है।
दहेज प्रथा के दुष्परिणाम

1.जो लड़कियां की दहेज नहीं ला पाती याद समय-समय पर ससुराल वालों की मांगे पूरी नहीं कर पाती उन्हें अनेक शारीरिक व मानसिक यातनाएं भुगतनी पड़ती है कभी कभी भी विवश होकर आत्महत्या भी कर लेती है अनेक बार ससुराल वाले उनकी हत्या भी कर देते हैं।

2.अनेक बार दहेज को लेकर विवाह मंडप में विवाद शुरू हो जाता है और कभी-कभी यहां तक नौबत आती है कि वीना विवाह की ही बारात लौट जाती है।

3.दहेज कम लाने के कारण अनेक बहुओं को ससुराल में ताने हुआ अपमानजनक बातें सुननी पड़ती है इससे परिवार में सदैव तनाव रहता है।

4.जिन लड़कियों के माता-पिता दहेज नहीं जुटा पाते तो कभी-कभी ऐसा भी होता है कि लड़कियां अविवाहित रह जाती हैं।

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