जर्मनी में हिटलर की महत्वाकांक्षा नाजियों को बढ़ावा यहूदियों का विरोध और साम्राज्यवादी नीति के कारण विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ मंचूरिया पर हमले से लेकर कोई स्लोवाकिया को हथियार जाने तक जापान इटली और जर्मनी के सभी हमलों को पश्चिमी देशों ने अपनी माउंट सहमति दी थी परंतु फिर भी ना जी वादी और फासीवादी शक्तियों की महत्वाकांक्षाओं पूर्ण नहीं हुई वे विश्व को नए सिरे से बंटवारे की योजना बना रहे थे।
द्वितीय विश्व युद्ध के कारण
1. वर्साय की संधि
वर्साय की संधि द्वितीय विश्वयुद्ध का एक प्रमुख कारण था वर्साय की संधि में मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी ऑस्ट्रिया इटली और टर्की के मानव हाथ पैर तोड़ कर रख दिए थे अर्थात पंगु बना दिया था इसमें विशेषकर जर्मनी को बहुत अपमानित किया गया ऑल सास और लॉरेंस का प्रांत वापस फ्रांस को दीजिए गया जर्मनी को युद्ध अपराधी घोषित किया गया उसकी सैनिक शक्ति को दुर्बल कर दिया गया जर्मनी पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डाला गया अतः जर्मनी के लोग इस अपमान का बदला लेना चाहते थे।
2. नाजी दल का उदय
1934 में नारी दल का प्रभाव पड़ा और हिटलर जर्मनी का तानाशाह बन गया वह जर्मन काम को विश्व की महान शक्ति बनाना चाहता था उसने वर्साय संधियों की धज्जियां उड़ा दी युद्ध नीति के सहारे उसने ऑस्ट्रिया स्विट्जरलैंड और चेकोस्लोवाकिया पर अधिकार कर लिया यही युद्ध नीति महायुद्ध का कारण मनी
3. फासीवाद
इटली में भी वर्साय की संधि से घोर असंतोष की थी परिणाम स्वरुप फासीवाद का जन्म हुआ मुसोलिनी ने हिटलर की भांति इटली में सैनिक सरकार की स्थापना की इटली में एबीसी नया तथा अल्बानिया पर अधिकार कर लिया उसकी युद्ध नीति से द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की।
4. राष्ट्र संघ की असफलता
प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात युद्ध को रोकने के लिए तथा विश्व में शांति बनाए रखने के लिए राष्ट्र संघ की स्थापना की गई परंतु यह संस्था असफल रही जब इटली ने अभी सीनियर जर्मनी ने ऑस्ट्रिया तथा चेकोस्लोवाकिया पर और जापान ने मंचूरिया पर अधिकार कर लिया तो राष्ट्र संघ उनके बढ़ते कदमों को रोकने की कोई कोशिश ना कर सकी।
5. उग्र राष्ट्रवाद की भावना
जर्मनी में हिटलर फ्रॉम से बदला लेने की योजनाएं बनाने लगा फ्रांस ने जर्मनी की औद्योगिक बस्ती रो हार पर अधिकार कर लिया था हिटलर ने नाजियों में उग्र राष्ट्रवाद की भावना कूट-कूट कर भरी कि हमें और हमारे जर्मन राष्ट्र को फ्रॉम से बदला लेना है जापान भी विस्तार वादी नीति अपनाए हुए था।
6. तुष्टीकरण की नीति
तुष्टीकरण का तात्पर्य है कि सी आक्रमक शक्ति को मनाने के लिए किसी कमजोर देश की बलि देना सन 1017 की रूसी क्रांति के बाद राष्ट्रों के साम्यवाद की ओर झुकाव से पश्चिमी शक्तियां साम्यवाद को अपना शत्रु बनाने लगी।
जर्मनी इटली जापान आदि देश साम्यवाद के कट्टर विरोधी थे हिटलर ने इटली से मित्रता कर साम्यवाद के विरुद्ध मोर्चा बना लिया तो फ्रांस और इंग्लैंड ने उसके प्रति उदार नीति अपनाई इसी नीति को तुष्टीकरण की नीति कहा जाता है।
7. सैनिक गुटों का उदय
प्रथम महायुद्ध की भांति द्वितीय महायुद्ध से पहले भी यूरोप दो विरोधी सैनिक गुटों में बट गया था हिटलर ने अपनी स्थिति सुदृढ़ करने के लिए गुड बंदी का सहारा लिया और इटली के तानाशाह मुसोलिनी को अपनी ओर मिला लिया सन 1936 में इनके बीच एक संधि हुई जो रोम बर्लिन दूरी के नाम से प्रसिद्ध है दूसरी और रूस और जापान की भी आपस में खटपट थी।
जर्मनी रूस का शत्रु था अतः 25 नवंबर 1936 ईस्वी में जर्मनी और जापान में रूस के विरुद्ध एक समझौता हुआ 1936 ईस्वी में इटली में भी इसमें शामिल हो गया रोम बर्लिन टोक्यो धुरी पूर्ण हुई एक घूंट में धुरी राष्ट्र थे और दूसरे गुट में इंग्लैंड रूस और फ्रांस के सभी देश सुरक्षा की आड़ में जबरदस्त सैनिक तैयारियां कर रहे थे।
8. आर्थिक मंदी
संपूर्ण विश्व में 1929 से 1930 में घोर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया इससे एक नई स्थिति उत्पन्न हो गई सभी देशों में बेकारी बढ़ गई और साधारण जनता की स्थिति सोचनीय हो गई सन् 1937 में जापान ने चीन पर आक्रमण करके उसके कई नगरों पर अधिकार कर लिया इसे विश्वयुद्ध का वातावरण निर्मित हो गया।
9. निशस्त्रीकरण की समस्या
वर्साय की संधि के अनुसार सभी राष्ट्र निशस्त्रीकरण की नीति का पालन करेंगे परंतु विजई राष्ट्रों ने जर्मनी से तो नहीं सच्ची किरण की शर्तों का पालन करवाया और स्वयं मुक्त रहें इससे निशस्त्रीकरण के स्थान पर स्पष्टीकरण की भावना को बल मिला जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने कागज के चिथड़े कह कर वर्साय की संधि को दुत्कार दिया।
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