Saturday, February 22, 2020

निर्वाचन आयोग के कार्य क्या क्या है?

1. चुनाव चिन्हों का आवंटन-
नाम वापसी की तिथि के पश्चात घोषित प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाते हैं मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह सुरक्षित रहते हैं मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को पार्टी का अधिकृत सी फॉर्म दिखाने पर पार्टी का सुरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाता है ऐसे कांग्रेस का हाथ का पंजा और भारतीय जनता पार्टी का कमल फूल आदि स्वतंत्र या निर्दलीय प्रत्याशियों को मुक्त चुनाव चिन्ह दिए जाते हैं जिनकी सूची विभिन्न प्रदेशों में जारी कर दी जाती है इस चुनाव चिन्हों में प्रत्याशी अपनी इच्छा अनुसार कोई भी चिह्न मांग सकता है परंतु इस संबंध में अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग का ही होता है।
Election Commission Work

2. चुनाव प्रचार-सन 1967 से चली आ रही व्यवस्था के अनुसार नाम वापसी और मतदान की तिथि के मध्य लगभग 20 दिन का अंतराल रहता है परंतु निर्वाचन आयोग और अन्य क्षेत्रों से प्राप्त सुझावों के आधार पर राष्ट्रपति ने 19 जनवरी 1992 को एक अध्यादेश निर्गत कर के लोकसभा तथा विधानसभा के निर्वाचन में चुनाव प्रचार की न
न्यूनतम अवधि 20 दिन से घटाकर 14 दिन कर दी है इस अवधि में प्रत्याशियों को अपने-अपने पक्ष में प्रचार करने का समुचित अवसर मिलता है यद्यपि के ना होने की संभावना के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दल अपना प्रचार करना प्रारंभ कर देते हैं परंतु नाम वापसी की तिथि के पश्चात विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के सामने आ जाने पर चुनाव प्रचार में गंभीरता और तीव्रता आ जाती है।

इसी अवधि में राजनीतिक दलों के द्वारा अपने अपने चुनाव घोषणापत्र जारी किए जाते हैं जिनमें वे अपनी अपनी नीतियों एवं कार्यक्रमों को स्पष्ट करते हैं अपने दल के समर्थकों की संख्या बढ़ाने भटकते मतदाताओं के मतों को बटोरने और विरोधी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को निर्धारित करने उद्देश्य से राजनीतिक दल सभा एवं सम्मेलनों जुलूस एवं रैलियों तथा नुक्कड़ सभाओं का आयोजन करके मतदाताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

घर-घर जाकर जनसंपर्क करते हैं और जनता से अपने पक्ष में मतदान करने का अनुरोध करते हैं पत्र-पत्रिकाओं तथा पोस्टरों विज्ञापनों और हैंडबिल्स के द्वारा अपनी बात मतदाताओं तक पहुंचाते हैं चुनाव प्रचार हेतु विभिन्न प्रकार के नारे बनाएं और प्रचारित किए जाते हैं इतना ही नहीं प्रचार और मतदाताओं से अपील करने के लिए राजनीतिक दल आकाशवाणी और दूरदर्शन का भी उपयोग करते हैं।

इसके लिए सामान्यतया प्रत्येक राजनीतिक दल को दो बार 15:15 मिनट का समय दिया जाता है इस चुनाव प्रचार इस सीमा तक पहुंच जाता है कि मतदाता प्रायः सभी उपलब्ध विकल्पों में से एक का चयन करने की स्थिति में आ जाता है मतदान की तिथि से लगभग 48 घंटे पूर्व चुनाव प्रचार समाप्त हो जाता है।

3. चुनाव स्थगन या पुनर्मतदान-प्रारंभिक व्यवस्था के अनुसार नामांकन की तिथि से मतदान की तिथि के मध्य किसी भी प्रत्याशी की मृत्यु हो जाने पर उस निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव स्थगित कर दिया जाता है परंतु 19 जनवरी 1992 को राष्ट्रपति द्वारा निर्गत अध्यादेश के आधार पर प्रारंभिक अवस्था में परिवर्तन करके यह व्यवस्था कर दी गई है कि निर्दलीय प्रत्याशी की मृत्यु होने पर चुनाव स्थगित नहीं होंगे किसी राजनीतिक दल के प्रत्याशी की मृत्यु होने पर ही चुनाव स्थगित होंगे।

इसके अतिरिक्त किन्ही मतदान केंद्रों पर किन व्यक्तियों द्वारा जबरन कब्जा कर लिए जाने मतदाताओं को डराया धमकाया जाने अथवा उन्हें मतदान करने से रोकने या मतदान के लिए नियुक्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अनियमितताएं बरती जाने की स्थिति में निर्वाचन अधिकारी की संतुष्टि या स्वयं की संतुष्टि के आधार पर निर्वाचन आयोग संबंधित मतदान केंद्रों पर दो या दो 3 दिन से अधिक अवधि के अंतर्गत पुनर्मतदान की व्यवस्था कर सकता है किसी निर्वाचन क्षेत्र में व्यापक रूप से अनियमितताएं और और धान धनिया बरती जाने की स्थिति में निर्वाचन आयोग द्वारा उस संपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र के मतदान को निरस्त कर दिया जाता है और उस निर्वाचन क्षेत्र के लिए पुनः नए निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा की जाती है।

0 comment:

Post a Comment