Friday, January 24, 2020

दक्षिण भारत में हिंदू साम्राज्य


हिंदुस्तान को कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक सूत्र में पिरोने के काम की नीव चाणक्य – चंद्रगुप्त ने मिलकर मगध साम्राज्य के रूप में रख दी थी । जिसे चंद्रगुप्त के पुत्र बिंदुसार ने आगे बढ़ाया । उसके प्रतिभावान पुत्र अशोक महान ने देश को हिमालय से हिंदमहासागर तक एक सत्ता के तले ले आया । यह 268 से 232 इसा पूर्व अशोक ने किया था । उसने कुल 36 साल में उस समय देश को एक कर दिया था । वह कन्धार से कामरुप एवं कश्मीर से कन्याकुमारी तक मौर्य साम्राज्य के अधीन ले आया । उसके बाद उसकी 17 पीढ़ियों में मगध साम्राज्य टुकड़े – टुकड़े हो गया । पुष्यशृंग ने अशोक के वंश के आख़री राजा ब्रहद्ररथ को मारकर गद्दी हथिया ली । हिंदुस्तान उत्तर और दक्षिण के सैकड़ों राज्यों में विभक्त हो गया । गुप्त काल में पौराणिक शास्त्रों का विकास लेखन हुआ । बाद में सांतवी सदी से ग्यारहवी सदी तक राजपूत काल माना जाता है । जिसमें तोमर चौहान परमार सिसोदिया आदि बहुत से सूर्यवंशी व चंद्रवंशी राजाओं ने राज्य स्थापित करके शासन किया ।

हर्षवर्धन ने 606 से 647 के बीच उत्तर में गंगा किनारे कान्यकुब्ज यानि आज के कन्नौज को राजधानी बनाकर नर्मदा और महानदी के उत्तर में एक सशक्त राज्य खड़ा किया । नर्मदा और महानदी के दक्षिण में , उसी अवधि में पुलकेसिन – II ने 610 से 642 तक दक्षिण भारत को एक झंडे तले कर साम्राज्य खड़ा किया । ये साम्राज्य इस्लाम के आने तक राजपूत हिंदू राज्यों के अधीन में बनते बिगड़ते रहे । अलाउद्दीन ख़िलजी ने दक्षिण के दरवाज़े खोल दिए तो तुर्क ईरानी अफ़ग़ानी बहमनी जवान अपना सैनिक भविष्य तलाशने हिंदुस्तान आने लगे । दिल्ली के सुल्तान ख़िलजी – तुग़लक़ उन्हें दक्षिण की तरफ़ धकेल देते थे । यह मुहम्मद तुग़लक़ के काल तक होता रहा । उसके समय में जब वह राजधानी दौलताबाद ले गया और चमड़े के सिक्के चलाए तो केंद्रीय सत्ता बिखर गई । उस बिखराव पर दक्षिण में दो बड़े साम्राज्य ख yड़े हुए । बहमनी और विजयनगर ।

मुहम्मद तुग़लक़ के मरते ही उसके एक सिपाहसालार हसन ने दौलताबाद पर क़ब्ज़ा कर लिया और गुलबर्गा राज्य को जीत कर सुल्तान अबुल मुज़फ़्फ़र अलाउद्दीन बहमन शाह के नाम से 3 अगस्त 1347 को गद्दी पर बैठकर बहमनी साम्राज्य की नीव रखी । उसके वंश ने 180 राज्य किया 1527 में बहमनी साम्राज्य के सूबेदारो ने अपने आप को आज़ाद घोषित करके बीजापुर गोलकुंडा अहमदनगर बीदर और बरार नाम से 5 राज्य बन लिए । गुलबर्गा के अधीन प्रताप रुद्र देव वारंगल का काकतिया राजा था । उसको मुहम्मद तुग़लक़ ने हरा कर उसके दो दरबारियों हरिहर और बुक्का राय को दिल्ली ले गया । उनकी बुद्धिमानी से खुश होकर उसने उन्हें दक्षिण के मसलों को सुलझाने भेजा तो उन्होंने स्वतंत्रता का आंदोलन चलाकर विजयनगर साम्राज्य बना डाला । पूरा दक्षिण भारत बहमनी और विजयनगर साम्राज्य में बँट गया । 1614 – 15 में गोलकुंडा अहमदनगर बीजापुर और बीदर के मुस्लिम शासकों ने इकट्ठा होकर विजयनगर साम्राज्य को समाप्त करके आपस में बाँट लिया ।

गोलकुंडा के शासक के अधीन एक मैसूर रियासत थी । जिसे बाद में औरंगज़ेब ने जीत लिया था । राजा ने मुग़लों की अधीनता स्वीकार कर ली थी । उस पर खोड़ियार वंश का राज्य था उसका सेनापति था हैदर अली जिसने 1766 में राजा को मारकर मैसूर हथिया लिया और फ्रेंच सेना से मिलकर पूरे दक्षिण पर एकछत्र राज्य स्थापित करने के ख़्वाब देखने लगा । हैदर अली एक सैनिक से शक्तिशाली राजा बनके अंग्रेज़ों को चुनौती बन गया । हैदर अली । मैसूर राज्य 1565 तक विजयनगर साम्राज्य का हिस्सा था । 1687 में औरंगज़ेब ने मैसूर जीत लिया तो वहाँ के खोड़ियार वंश के राजा ने उसकी अधीनता मंजूर कर ली । 1704 से वहाँ का शासक खोड़ियार वंश का राजा चिक्का कृष्णा राव था । वह ढीला ढाला शासक था । उसके दो मंत्री नांजराज और देवराज थे जिन्होंने सत्ता अपने हाँथों में समेट ली थी । हैदर


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