Friday, January 24, 2020

निरक्षरता क्या है और इसके क्या कारण है


भारतीय लोकतंत्र के समक्ष जो चुनौतियां हैं उनमें निरक्षरता भी कम महत्वपूर्ण चुनौती नहीं है स्वतंत्रता प्राप्ति के लगभग 70 वर्षों की अवधि में भी समस्त भारतवासियों को साक्षर नहीं बनाया जा सका है सन 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में केवल 74.4% व्यक्ति की साक्षर हैं भारत में बिहार उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश हिमाचल प्रदेश और राजस्थान आदि हिंदीभाषी क्षेत्रों में निरक्षरता सर्वाधिक है मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तो इतनी निरक्षरता है कि वहां साक्षरता का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से बहुत ही कम है देश की निरक्षरता जनता ना तो स्वतंत्रता के महत्व को समझती है और ना ही लोकतंत्र के महत्व को इस प्रकार निरक्षरता भारत की लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है।

निरक्षरता के कारण-


1.सामाजिक पिछड़ापन ‌सामाजिक पिछड़ापन भी निरक्षरता का प्रमुख कारण है यहां के लोग सामाजिक रूप से बहुत पिछड़े हुए हैं।

जागरूकता की कमी-भारत में जनता में साक्षरता के प्रति जागरूकता की कमी है यहां के लोग साक्षरता के लाभ से सही अर्थों में अनजान हैं

रूढ़िवादिता-रूढ़िवादिता निरक्षरता का प्रमुख कारण है आज भी बहुत से लोग लड़कियों को रूढ़िवादिता के चलते नहीं पढ़ाते।

गरीबी-निरक्षरता का मूल कारण गरीबी है गरीबी के कारण लोग सिर्फ रोजी-रोटी की बात ही सोचते हैं साक्षरता के प्रति उनकी सोच नहीं होती।

साक्षरता संबंधी उचित साधनों की कमी-साक्षरता संबंधित ऊंची साधनों की कमी निरक्षरता का एक कारण है साक्षरता से जुड़े लोगों के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं साथ-साथ साक्षरता के प्रति संबंधित अधिकारियों का दिल से लगाव नहीं है सिर्फ इस से जुड़ के लोग आंकड़ों का खेल खेलते हैं वह व्यवहार में कुछ नहीं करते।

निरक्षरता दूर करने के सुझाव


राष्ट्रीय नीति-भारत की केंद्र सरकार द्वारा संपूर्ण देश के लिए सभी नागरिकों को शिक्षित करने हेतु एक राष्ट्रीय नीति बनाई जाए इस नीति को बनाते समय सभी राज्य सरकारों से भी विचार विमर्श किया जाए।

अनिवार्य वह निशुल्क शिक्षा-सरकार द्वारा एक निश्चित स्तर तक सभी नागरिकों हेतु अनिवार्य और निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।
विशेष शिक्षा व्यवस्था-वयस्कों महिलाओं व पिछड़े क्षेत्रों के नागरिकों व गरीबों हेतु शिक्षा की अलग-अलग विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए।
संचार साधनों का उपयोग शिक्षा का संचार साधनों द्वारा उपयोग करना चाहिए जिससे आज के समय में सभी लोगों के पास आसानी से यह बात पहुंच जाएगी।
वित्तीय सहायता-शिक्षा के कार्य में लगे गैर सरकारी संस्थाओं को यथासंभव सरकार द्वारा वित्तीय सहायता देनी चाहिए।
कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की भर्ती-साक्षरता अभियान में कर्तव्यनिष्ठा अधिकारियों को ही नियुक्त किया जाना चाहिए जिससे वह अपने मन लगाकर काम कर सकें।
शिक्षित नागरिकों द्वारा योगदान-देश के शिक्षित नागरिकों को भी साक्षात करने हेतु नागरिकों को मदद करना अपना कर्तव्य समझना चाहिए।
निरक्षरता पर भारतीय लोकतंत्र का प्रभाव

भारत में निरक्षरता की स्थिति के दुष्परिणाम स्वरूप भारतीय जनता लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था से लाभान्वित नहीं हो सकी है सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक समानता की स्थापना राजनीतिक चेतना का विकास मौलिक अधिकारों की उपलब्धता मदर मताधिकार के उचित प्रयोग की व्यवस्था देश के शासन में आम जनता की भागीदारी और स्वतंत्रता की रक्षा की व्यवस्था आदि लोकतंत्र के आधारभूत सिद्धांत और आम जनता के लिए वरदान हैं परंतु निरक्षरता की स्थिति के कारण देश की आम जनता लोकतंत्र के इस वरदान का लाभ नहीं उठा पाती।

निरक्षरता की स्थिति ने सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक विषमता की स्थिति को बढ़ावा दिया है इस स्थिति के कारण ही भारतीय नागरिक अपने अधिकारों कर्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति उतना सचेत नहीं हो पाया है जितना कि होना चाहिए इस स्थिति के कारण आम जनता में वांछित मात्रा में राजनीतिक चेतना का भी विकास नहीं हो सकता है आम जनता का एक बहुत बड़ा आज भी लोकतंत्र के महत्वपूर्ण साधन है मताधिकार का ना तो मूल्य ही समझता है और ना ही उसके उचित प्रयोग करता है।

निरक्षर लोगों द्वारा भरेगी मताधिकार का प्रयोग किया जाता है परंतु उससे समाज के प्रभावशाली लोगों धनी वर्ग और राजनेताओं ने उनकी निरक्षरता जनित नासमझी से अपने हितों की साधना की है निरक्षरता के कारण देश की विकास योजनाओं का भी आम जनता को वांछित रूप से लाभ प्राप्त नहीं हो सका।

आमजन तक कि निरक्षरता का लाभ उठाते हुए गांव की महाजन ओ तथा पटवारी से लेकर बड़े-बड़े अधिकारियों ने उनका भरपूर शोषण किया है इस प्रकार निरक्षरता भारतीय लोकतंत्र के लिए एक चुनौती बनकर उसे प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हुए उसकी सफलता के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा सिद्ध हो रही है।


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