Friday, January 31, 2020

गांधीवाद क्या है गांधीवाद की परिभाषा

गांधीवाद क्या है गांधीवाद की परिभाषा

महात्मा गांधी एक महान राजनीतिज्ञ आदर्शवादी अध्यात्म वादी मानवता के अनन्य उपासक थे संत विचारों को हरा दिया और समाज सुधारक थे राष्ट्रीय आंदोलन के सर्वोच्च नेता से गांधी जी ने अथक परिश्रम कर भारत राष्ट्रीय आंदोलन का उत्तरार्ध में प्रदर्शन किया और भारत को स्वतंत्रता प्राप्ति की।

गांधीवाद का अर्थ

गांधी जी स्वयं को किसी नवीन संप्रदायों सिद्धांत का प्रवर्तक नहीं मानते थे लेकिन नाम से कोई बात नहीं चलाना चाहते थे उन्होंने पत्र में लिखा था कि गांधीवाद नाम की कोई वस्तु नहीं है अपने पीछे कोई संपर्क नहीं छोड़ना चाहता हूं मैं कि नहीं सिद्धांत अथवा मत को चलाने का दावा नहीं करता इस शक्ल दिखाने के लिए मेरे पास कुछ नहीं है आप इसे गाने बाद नहीं करेंगे क्योंकि इसमें कोई वाद ही नहीं है।

महात्मा गांधी की राजनीति का कोई क्रमबद्ध सिद्धांत प्रतिपादित करने की चेष्टा नहीं की उनके कदमों में विरोध किया और संबद्धता भी दिखाई पड़ती है उन्होंने अपने विचारों के प्रतिपादन में वैज्ञानिक प्रणाली का भी सहारा नहीं लिया उनके विचारों को सुव्यवस्थित राजनीतिक दर्शन नहीं माना जा सकता।

वस्तुतः गांधीजी के अनुयायियों प्रशंसकों और आलोचकों ने समय-समय पर उनके द्वारा अभिव्यक्त विचारों को संग्रहित किया तथा उसे ही गांधीवाद का नाम दिया।

गांधीवाद वस्तुतः एक राजनीतिक दर्शन न होकर एक जीवन दर्शन है गांधी जी के विचारों में एकरूपता है जिन्होंने गांधी जी ने अपने हार जीवन के अनुभव के आधार पर सुजीत कर संकलित किया पट्टाभी सीता मैया के अनुसार-गांधीवाद कुछ नियमों एवं सिद्धांतों का संकलन मात्र ना होकर जीवन का दर्शन है यह जीवन के प्रति नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है और आधुनिक जीवन की समस्याओं को प्राचीन भारतीय दर्शन के आधार पर हल करने का प्रयास करता है।

गांधी जी के प्रमुख विचार उनकी प्रमुख पुस्तक हिंदी स्वराज्य आत्मकथा अथवा मेरे सत्य के साथ प्रयोग सत्याग्रह सर्वोदय शांति और युद्ध में अहिंसा आदमी तथा साप्ताहिक पत्र दक्षिण अफ्रीका में इंडियन ओपिनियन भारत में यंग इंडिया हरिजन हरिजन सेवक नवजीवन आदि में मिलता है।

गांधी जी के विचारों का आधार

गांधी जी ने राजनीतिक सामाजिक तथा आर्थिक सभी प्रश्नों पर विचार प्रकट किए हैं उनके विचारों पर कई लेखकों और ग्रंथों का प्रभाव पड़ा गीता से उन्होंने कर्मयोग का पाठ पढ़ा महात्मा गांधी करनी होगी जो सदैव अपने कर्तव्य पालन में रहते थे जैन धर्म शिक्षा के सिद्धांत का पाठ पढ़ा और उसे अपनी ही जीवन का आधार नहीं माना बल्कि राजनीतिक और आर्थिक जीवन का भी आधार माना।

जॉन रस्किन की पुस्तक "अन्टू दिस लास्ट" से गांधी जी ने यहां शिक्षक की अच्छी अर्थव्यवस्था वह है जो सबका भला करें टॉलस्टॉय की पुस्तक ईश्वर का साम्राज्य आपके अंदर है को पढ़कर गांधी जी ने कहा था मेरा संशय और नास्तिकता दूर हो गए और अहिंसा के प्रति मेरा विश्वास दृढ़ हो गया।

निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि गांधी जी का दर्शन एक ऐसा दर्शन है इसमें संसार के सम्मुख कोणों के संतों की शिक्षण आकर सम्मिलित हो गई हैं और जिनकी उन्होंने अपनी व्याख्या दी है।

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