राजपूत काल का इतिहास
मध्यकालीन भारतीय समाज में ऐसे अनेक नवी नेतृत्व उभरे जिनका हमारी संस्कृति के विभिन्न पक्षों पर व्यापक प्रभाव पड़ा आठवीं से 12वीं सदी तक एक काल में अनेक छोटे राज्यों का अस्तित्व था प्रतिहार पाल और राष्ट्रकूट ओके मध्य वर्चस्व के लिए संघर्ष जारी सा सामान्य तौर पर राजनीतिक टकराव जारी का व्यापार और नगरी संस्कृति की अवनति जारी थी इसके बावजूद देश में वास्तुशिल्प के प्रति अनेक मंदिरों का क्षेत्रों में ही आधुनिक भारतीय भाषाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान था भवन निर्माण साहित्य और दर्शन का काफी विकास हुआ हैदक्षिण पूर्वी एशिया के साथ व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क भी बड़े इसी समय महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने चार महत्वपूर्ण मठों की स्थापना की उत्तर में बद्रीनारायण धाम लक्ष्मी रामेश्वरम पूर्व में जगन्नाथ पुरी और पश्चिम में द्वारिका पुरी इन चारों धाम के से देश की सांस्कृतिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ।सातवीं सदी में अरबों से भारतीयों के व्यापारी संबंध के कारण इस्लाम धर्म का आगमन भारत में हुआ एक नई सभ्यता संस्कृति धर्म भाषा और जीवनशैली भारत में प्रवेश कर रही थी जिसका संपूर्ण भारतीय जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ने वाला था यह प्राचीन भारतीय इतिहास का अंतिम चरण था 10 वीं सदी में मध्य पश्चिमी एशिया में तुर्कों ने शक्तिशाली साम्राज्य स्थापित किया 10 वीं सदी के अंत तथा 11वीं सदी के प्रारंभ में तुर्कों ने भारत पर हमला किया 12 वीं सदी के अंत में 13 वी सदी सदी के आरंभिक काल भारत दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई।
मध्यकाल
दिल्ली सल्तनत की स्थापना भारतीय इतिहास में मध्यकाल का आरंभ माना जाता है काल में उत्तर से दक्षिण भारत के कुछ भागों का राजनीतिक एकीकरण समिति में दिल्ली सल्तनत का पतन हो गया देश के अनेक भागों में पुनः छोटे-छोटे स्थापित होने लगे दक्षिण भारत में दो शक्तिशाली राज्य स्थापित हुए आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए व्यापार और दस्तकारी को बढ़ावा मिला सांस्कृतिक दृष्टि से भारत की समन्वित संस्कृति के विकास का नया युग आरंभ हुआ नहीं कलाओं और भवन निर्माण की नई शैलियों का देश के सभी भागों में प्रसार हुआ।भाषा और साहित्य का उल्लेखनीय विकास इस काल में हुआ और वे भाषाएं जो पहले से ही विकसित होती जा रही थी उन्हें महत्वपूर्ण साहित्य लिखा गया अरबी और फारसी को महत्वपूर्ण स्थान मिला अरबी मुख्यतः इस्लामी शिक्षा पर आधारित थी फांसी को संस्कृत के स्थान पर दरबारी भाषा का स्थान मिला और फारसी और संस्कृत मिलकर समृद्ध हुई और नवीन ज्ञान प्राप्ति की भाषाएं बनी भक्ति मारी संतों का भी भाषाओं को समृद्ध बनाने में योगदान रहा भक्ति आंदोलन के कवि और नानक प्रमुख संत थे जिन्होंने धार्मिक संकीर्णता ऊंच-नीच ओखली का मकान लोककथा अंधविश्वासों की बड़ी निंदा की।
संत कवि तुलसीदास और सूरदास ने क्रमशः श्रीराम और श्रीकृष्ण की भक्ति और मानवों में परस्पर प्रेम व करुणा का संदेश दिया भक्ति आंदोलन के साथ ही इस काल का प्रमुख आंदोलन सूफी आंदोलन था सूफी रहस्यम मा वागी मुसलमान संत थे जिन्होंने लोगों को प्यार और भाईचारे का उपदेश दिया इन दोनों आंदोलनों ने धार्मिक संकीर्णता और अलगाववाद का विरोध किया और सभी समुदायों को साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मानवतावाद की इस युग में विकसित हुआ यहां एक पदार्थ विचार था भारतीय संस्कृति में नई प्रवृत्तियों का समावेश का एक समन्वित संस्कृति के विकास की प्रक्रिया 16वीं 17वीं शताब्दी में अपने उच्चतम शिखर पर पहुंची इस युग में मुगलों ने एक विशाल साम्राज्य का गठन किया अकबर मुगल वंश के सबसे महान सम्राट थे उन्होंने भी अशोक महान की तरह सर्वधर्म समभाव नीति का अनुसरण किया।
इस काल में भारतीय भवन निर्माण कला ईरानी परंपराओं से प्रभावित विशिष्ट शैली तथा चित्रकला का विकास हुआ एक नई भाषा उर्दू का विकास हुआ जो नगरी यह जनता की संपर्क भाषा के रूप में देश के अनेक भागों में प्रचलित हुई और फारसी संस्कृत तथा हिंदी का कालजई साहित्य रचा गया।

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