Friday, January 24, 2020

प्रथम आंग्ल वार - पहला मैसूर युद्ध



अधीनता मंजूर कर ली । 1704 से वहाँ का शासक खोडियार वंश का राजा चिक्का कृष्णा राव था । वह ढीला ढाला शासक था । उसके दो मंत्री नांजराज और देवराज थे जिन्होंने सत्ता अपने हाँथों में समेट ली थी । हैदर अली के पिता फ़तह मुहम्मद कोलार के निवासी थे जहाँ सोने की खदान हैं । वे मैसूर स्टेट के मुलाजिम थे । हैदर अली 1722 में कोलार में पैदा हुआ था । 1749 में उसने एक सिपाही के रूप में मैसूर राज्य की सेना में नौकरी शुरू की । वह बहादुर और महत्वाकांक्षी था । 1755 में डिंदिगल क़स्बे का फ़ौजदार बना दिया गया । उसकी प्रशासनिक क़ाबिलियत को नांजराज ने पहचान कर उसे मैसूर लाया और फ्रेंच तरीके से सेना की तैयारी में उसे लगा दिया ।
उसने फ्रेंच जनरल के साथ मिलकर यूरोपीय तरीके की सेना तैयार कर ली । 1761 में राजा चिक्का राव को हटाकर नांजराज खुद सत्ता हथियाना चाहता था तो हैदर अली तब तक सेनापति बन चुका था । उसने राजा का साथ दिया और नांजराज को श्रीरंगपतनम से निकाल बाहर किया । हैदर अली के सेनापति होने के कारण नांजराज उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाया ।

पहला आंग्ल – प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध

कुछ दिन बाद हैदर अली ने राजा चिक्का राव को भी जेल में डालकर मैसूर राज्य की सत्ता हथिया ली । इस तरह हैदर अली मैसूर पर क़ाबिज़ हो गया । यह वही समय था जब मराठे पानीपत में बुरी तरह हार कर अपनी फ़ौज के 40 , 000 सैनिक गवाँकर होलकर , सिन्धिया , भोंसले खेमों में बँट रहे थे । हैदर अली दक्षिण भारत का बादशाह बनने को बेताब था इसलिए उसने 1761 में ही मैसूर से लगे मराठा इलाक़े बेदनूर को जीत कर अपने राज्य में मिला लिया ।
1762 में उसने निज़ाम हैदराबाद के इलाक़े उरूलि को भी जीत लिया । दक्षिण में उस समय हैदर अली , मराठे , निज़ाम और अंग्रेज़ चार प्रतिद्वंद्वी थे जो दक्षिण भारत को अपने क़ब्ज़े में लाना चाहते थे । अंग्रेज़ों ने यहाँ नई चाल चली । हैदर अली अंग्रेज़ों से मराठों के विरुद्ध मित्रता करना चाहता था । निज़ाम अंग्रेज़ों से हैदर अली के विरुद्ध संधि चाहता था । परंतु वहाँ अंग्रेज़ों ने इनको आपस में लड़ने देने की नीति अपनाई और रॉयल सीमा इलाक़े में फ़ौज रखकर नज़र रखते रहे ।

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