Sunday, January 19, 2020

मराठा सामाज्य की शुरुआत – भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी



सबसे पहले शिवाजी ने अपने दल के साथ तोरण क़िले को बीजापुर राज्य की फ़ौज से छीन लिया । वहाँ उनको 2 लाख हूंन मुग़लों की मुद्रा मिली । उस धन से उन्होंने रायगढ़ में नया क़िला बनवाया । बीजापुर के सुल्तान ने कोई क़दम उन्हें रोकने को नहीं उठाया क्योंकि सरकार कमज़ोर थी और शिवाजी ने दरबारियों को रिश्वत खिलाकर अपनी ओर मिला लिया था वो शिवाजी के विरुद्ध कोई कार्यवाही का विरोध दरबार में करते थे । इसी स्थिति का लाभ उठाकर शिवाजी ने चकन और कोंडांना के क़िलों पर भी अधिकार कर लिया ।

शिवाजी के पिता बीजापुर राज में दरबारी थे । शिवाजी के लगातार इलाक़ा हथियाने से नाराज़ होकर सुल्तान ने 1648 में शाहजी भोंसले को गिरफ़्तार कर लिया । उस समय औरंगज़ेब का शाहज़ादा मुराद बख़्श दक्षिण का सूबेदार था वह औरंगाबाद में मौजूद था और बीजापुर को मुग़ल साम्राज्य में मिलाने की जुगत में मराठा सरदारों को फोड़ रहा था । 

शिवाजी ने फ़ौरन मुरादबख़्श को बीजापुर के विरुद्ध सैनिक सहायता मुहैया करने की अर्जी भिजवा दी , और इस बात की ख़बर बीजापुर सुल्तान तक पहुँचा दी । सुल्तान घबरा गया और शाह जी को रिहा करने की सोचने लगा परंतु मुराद बख़्श ने शिवाजी की अर्जी को रद्दी की टोकरी के हवाले कर दिया तो शिवाजी ने तुरंत बीजापुर सुल्तान को मुग़लों के विरुद्ध लड़ाई में साथ देने का संदेश भिजवा दिया ।

मराठा सामाज्य की शुरुआत – भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी

शाहजी आज़ाद हो गए उनकी दरबारी हैसियत वापस आ गई । ऐसा शातिर तेज़ दिमाग़ था शिवाजी का । जिसमें तुरंत फ़ायदा मिल रहा ही उसे तुरंत लपक लेना । उसके तुरंत बाद शिवाजी ने 1648 में ही बीजापुर के एक मराठा सरदार नीलोजी नीलकंठ से पुरंदर का क़िला छीन लिया । उसके पश्चात उनकी निगाह दक्षिण – पश्चिम में फैले जावली के क़िले पर गई जो मालदार रियासत थी और शिवाजी के विरुद्ध बीजापुर से मिलकर षड्यन्त्र कर रही थी । उन्होंने 1656 में रिश्वत खिलाकर चुपचाप मराठा सरदार चंद्रराव मोरे की हत्या करवा दी । मोरे के दो लड़कों में उत्तराधिकार का झगड़ा छिड़ गया तो उन्होंने शिवाजी को मामला सुलझाने बुलाया । 

शिवाजी अपने विश्वस्त साथियों के साथ जावली के क़िले पर गए और किलेदार हनुमंत राव मोरे को मारकर क़ब्ज़ा कर लिया । दोनो लड़के जान बचाकर भाग गए । इस प्रकार शिवाजी को अपना साम्राज्य दक्षिण – पश्चिम में कोंकण तक फैलाने का रास्ता खुल गया । तब ही उन्होंने राजगढ़ दुर्ग भी हथिया लिया । इस सफलता से मराठों में साहस और उत्साह का संचार हो गया ।

शिवाजी के दिमाग़ में पहले सम्पूर्ण दक्षिण में मराठा हिंद स्वराज स्थापित करने की योजना बन रही थी । जिसमें मुग़ल अहमदनगर बीजापुर मोहरों की तरह थे । शिवाजी की मुग़लों से मुठभेड़ । औरंगज़ेब और शिवाजी मध्ययुगीन भारतीय के इतिहास के दो ध्रुव थे । ठीक एक दूसरे के विपरीत । पहला दूसरे को जड़ से मिटाने को उद्यत दूसरा पहले की नाफरमानी को कटिबद्ध । पहला दूसरे को मिटाने में ख़ज़ाना लुटा रहा था और दूसरा उस पहले से निपटने के लिए ख़ज़ाना लूट रहा था । 1657 में औरंगज़ेब दक्षिण का सूबेदार था तब बादशाह शाहजहाँ बीजापुर को जीतने के लिए मराठा सरदारों को फुसलाने में लगा

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