Sunday, August 26, 2018

बंदर और लकड़ी के खूंटे की कहानी l The Monkey and The Wedge Story In Hindi

Hello दोस्तों आज के पोस्ट में आप सभी का स्वागत है l आज के पोस्ट में हम पंचतंत्र की कहानी आपको बताने वाले हैं l ये कहानी एक बन्दर की है l और लकड़ी के खूंटे की है l ये हमे एक अच्छा ज्ञान देने वाली कहानी है जो आपको जरुर पसंद आएगी l 

तो दोस्तों अगर आप बन्दर के बेवकूफी वाले इस कहानी को पढना चाहते हैं और जानना चाहते हैं की कैसे बंदर की पूंछ जख्मी हो गये तो आप इस लेख को आगे पढ़ें l 

पंचतंत्र बंदर और लकड़ी के खूंटे की कहानी



friends ये कहानी आपको जरुर interesting और ज्ञानवर्धक लगेगी l ये हमे अपने जीवन जीने की शैली को बताएगा l 

बंदर और लकड़ी के खूंटे की कहानी l 



एक समय की बात है जो बहुत पुरानी है l उस समय एक शहर में लकड़ी का कुछ काम चल रहा था l जब उस शहर में मंदिर का निर्माण किया जा रहा था l  मंदिर में लकडी का काम बहुत था इसलिए लकडी चीरने वाले बहुत से मज़दूर काम पर लगे हुए थे। 

यहां-वहां लकडी के लठ्टे पडे हुए थे और लठ्टे व शहतीर चीरने का काम चल रहा था। सारे मज़दूरों को दोपहर का भोजन करने के लिए शहर जाना पडता थाइसलिए दोपहर के समय एक घंटे तक वहां कोई नहीं होता था। एक दिन खाने का समय हुआ तो सारे मज़दूर काम छोडकर चल दिए। एक लठ्टा आधा चिरा रह गया था। आधे चिरे लठ्टे में मज़दूर लकडी का कीला फंसाकर चले गए। ऐसा करने से दोबारा आरी घुसाने में आसानी रहती है

तभी वहां बंदरों का एक दल उछलता-कूदता आया। उनमें एक शरारती बंदर भी थाजो बिना मतलब चीजों से छेडछाड करता रहता था। उसको उलटे सीधे काम करने की आदत थी । बंदरों के सरदार ने सबको वहां पडी चीजों से छेडछाड न करने का आदेश दिया। सारे बंदर पेडों की ओर चल दिएपर वह शैतान बंदर सबकी नजर बचाकर पीछे रह गया और लगा अडंगेबाजी करने।

शरारती बंदर की निगाह आधे चिरे लकड़ी के लठ्ठे पर पडी। बस, वह उसी तरफ चल पडा और बीच में अडाए हुए लकड़ी का खूंटा (छिनी) को देखने लगा और फिर उसने पास पडी आरी को देखा। उसे उठाकर लकड़ी पर रगड़ने लगा। उससे किर्रर्र-किर्रर्र की आवाज़ निकलने लगी तो उसने गुस्से से आरी पटक दी। उन बंदरो की भाषा में किर्रर्र-किर्रर्र का अर्थ ‘निखट्टू’ था। वह दोबारा लठ्ठे के बीच फंसे खूंटा को देखने लगा।
शेतान बन्दर के दिमाग में कौतुहल होने लगा कि इस गट्टा को लठ्ठे के बीच में से निकाल दिया जाए तो क्या होगा। अब वह गट्टा  को पकड़कर उसे बाहर निकालने के लिए ज़ोर आजमाइश करने लगा। लठ्ठे के बीच फंसाया गया खूंटा (छिनी ) दो हिस्सों के बीच बहुत मज़बूती से जकडा गया होता हैं, क्योंकि लठ्ठे के दो हिस्सा बहुत मज़बूत स्प्रिंग वाले क्लिप की तरह उसे दबाकर रखते हैं।
शरारती बंदर लकड़ी के गट्टा को ज़ोर लगाकर हिलाने का प्रयास करने लगा। जोर लगाने पर गट्टा हिलने व खिसकने लगा तो बंदर अपनी शक्ति पर बहुत प्रसन्न हुआ।
वह और ज़ोर से खौं-खौं करता गट्टा सरकाने लगा। इस धींगा-मुश्ती के बीच बंदर की पूंछ दो हिस्सों के बीच फँस गई थी, जिसका उसे पता ही नहीं लगा।
उसने उत्साहित होकर एक जोरदार झटका मारा और जैसे ही गट्टा बाहर खिंचा, लठ्ठे के दो चिरे भाग फटाक से क्लिप की तरह जुड़ गए और बीच में बंदर की पूंछ फंस गई। बंदर दर्द से चिल्ला उठा।

तभी कारीगर वहां खाना खाकर वापस आये। कारीगरों को देखते ही बंदर ने वहाँ से भागने के लिए ज़ोर लगाया तो उसकी पूंछ टूट गई। वह चीखता हुआ टूटी पूंछ लेकर भागा।
तो दोस्तों आपको ये कहानी कैसी लगी इसके बारे में आप plz हमे कमेंट में जरुर बताएं और इसके अलावा आप को इस कहानी से क्या सीख मिलती है इसके बारे में आप हमे बताने का प्रयास करें जिससे हमे भी कुछ नए अनुभव प्राप्त होंगे l 
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