सिकंदर के बारे में आपने अभी तक ज्यादातर अच्छी बातें ही सुनी होंगी l जिसमे उसके विश्व विजेता उदारता शामिल हैं l लेकिन इस लेख को पढने के बाद आपके दिमाग से वो सब बातें निकल जाएगी l उसके बारे में हम पूरी जानकारी यहाँ पर देंगे l
दुनिया भले सिकंदर को महान कहती रहे परन्तु इतिहास के पद चिन्ह बताते है की वह कोई महान नही बस एक क्रुर शासक था l वह जिसे चाहता अपनी मर्ज़ी से बिना किसी गलती या फिर छोटी सी गलती पर म्रत्यु के हवाले कर देता था l सिकंदर ग्रीक का शासक था l
अलेक्जेंडर सिकन्दर का जीवन परिचय l और रोचक जानकारी
अलेक्जेंडर का जन्म 20 जुलाई 356 ईसा पूर्व में “पेला” में हुआ था, जो की प्राचीन नेपोलियन की राजधानी थी l अलेक्जेंडर फिलिप द्वितीय का पुत्र था, जो मेक्डोनिया और ओलम्पिया के राजा थे और इसके पडोसी राज्य एपिरुस की राजकुमारी ओलिम्पिया उनकी माँ थी l एलेक्जेंडर के नाना राजा निओप्टोलेमस थे l
सिकन्दर का वास्तविक नाम अलेक्जेंडर तृतीय था l भारत में उसे सिकंदर कहकर सम्बोधित किया जाता हैं l अलेक्जेंडर तृतीय मेकडोनिया का राजा और पर्शियन साम्राज्य का वो विजेता था, जिसे अपने जीवन में सबसे ज्यादा किये गए फौजी अभियानों के लिए जाना जाता हैं l ग्रीक इतिहासकारों के अनुसार अलेक्जेंडर ने पूरी दुनिया को जीत लिया था, इसलिए उसे विश्व विजेता भी कहा जाता है l और उसके नाम के साथ महान या दी ग्रेट भी लगाया जाता हैं l
अलेक्जांड्रिया नाम का एक नया राज्य बसाया
सिकंदर सिर्फ बीस वर्ष की आयु में मेसिडोनिया का राजा बना और विश्व को जीत लेने का सपना बुनने लगा। अपने पिता की एशिया माईनर को जीतने की इच्छा को पूरी करने के लिए अपने सैनिकों, हथियारों और लश्कर के साथ निकल पड़ा। इसके बाद लगातार सिकंदर को एक के बाद सफलता मिलने लगी और वह अपने उद्देश्य की ओर तेजी से बढ़ने लगा। कई छोटे बड़े राज्यों को जीतने के बाद वह मिस्र तक जा पहुंचा। जहां उसने अलेक्जांड्रिया नाम का एक नया राज्य बसाया। यहां उसने एक विश्वविद्यालय की स्थापना की साथ ही अन्य कई इमारतों का निर्माण करवाया।
33 वर्ष की आयु में इस दुनिया को छोड़ा
कुछ समय बाद सिकन्दर ने भारत को जीतने का मन बनाया और भारत पर आक्रमण कर दिया। इस युद्ध् में उसने भारत का सीमांत प्रदेश जीत लिया। लेकिन भारतीय राजा पोरस ने उसे कड़ी टक्कर दी। जिसके बाद वह ईरान की ओर लौट गया। 323 ई.पू. में वह बेबीलोन पहुंचा और वहां वह एक बीमारी के दौरान 33 वर्ष की आयु में इस दुनिया को छोड़ कर चला गया।
सिकंदर की शिक्षा
अलेक्जेंडर ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अपने रिश्तेदार दी स्टर्न लियोनीडास ऑफ़ एपिरुस से ली थी, जिसे फिलीप ने अलेक्जेंडर को गणित,घुड़सवारी और धनुर्विध्या सिखाने के लिए नियुक्त किया था l लेकिन वो अलेक्जेंडर के उग्र और विद्रोही स्वभाव को नहीं सम्भाल सके थे l
जब वह 13 वर्ष का हुआ, तब फिलीप ने सिकन्दर के लिए एक निजी शिक्षक एरिसटोटल की नियुक्ति की l एरिस्टोटल को भारत में अरस्तु कहा जाता हैं l अगले 3 वर्षों तक अरस्तु ने सिकंदर को साहित्य की शिक्षा दी और वाक्पटुता भी सिखाई, इसके अलावा अरस्तु ने सिकन्दर का रुझान विज्ञान ,दर्शन-शास्त्र और मेडिकल के क्षेत्र में भी जगाया, और ये सभी विधाए ही कालान्तर में सिकन्दर के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई l
सिकंदर और भारत
328 में अलेक्जेंडर ने भारत में पोरुस की सेना को हराया, लेकिन वो पोरुस के पराक्रम से बहुत प्रभावित हुआ और उसे वापिस राजा बना दिया l अलेक्जेंडर ने सिन्धु के पूर्व की तरफ बढ़ने की कोशिश की, लेकिन उसकी सेना ने आगे बढने से मना कर दिया l
और वापिस लौटने को कहा l 325 में अलेक्जेंडर ने ठीक होने के बाद अपनी सेना के साथ उत्तर की तरफ पर्शियन खाड़ी के सहारे का रुख किया, उस समय बहुत से लोग बीमार पड गए, कुछ चोटिल हो गए, तो कुछ की मृत्यु हो गयी l
अपने नेतृत्व और प्रभाव को बनाए रखने के लिए उसने पर्शिया के प्रबुद्ध जनों को मेक्डोनिया के प्रबुद्ध जनो से मिलाने का सोचा, जिससे एक शासक वर्ग बनाया जा सके l इसी क्रम में उसने सुसा में उसने मेक्डोनिया के बहुत से लोगो को पर्शिया की राजकुमारियों से शादी करवाई l
सिकंदर के बारे में तथ्य
1. 13 साल की उम्र में सिकंदर के पिता Philip ने उन्हें विश्व के महानतम शिक्षकों में से एक, अरस्तु के पास ज्ञान अर्जित करने के लिए भेजा था| सिकंदर ने 16 साल की उम्र तक अरस्तु से शिक्षा ली| उसके बाद Macedonia का राजकाज संभालने के लिए घर लौट गया l
2. 6 साल के संघर्ष के बाद सिकंदर ने फ़ारसी संस्कृति का गढ़ कहे जाने वाले, Persepolis शहर पर आधिपत्य स्थापित किया| इसके बाद उसने फ़ारसियों की वेश-भूषा अपना ली थी l
3. पूरी दुनिया पर हुकूमत का ख़्वाब देखने वाले सिकंदर ने स्पार्टा की तरफ़ आंख उठाने की हिम्मत नहीं की थी l
4. सिकंदर, ग्रीस के महान कथाकार, Homer के लिखे महाकाव्य Illiad से बहुत प्रभावित था|इस किताब को वो हमेशा अपने साथ रखता था l
5. सिकंदर ने अपनी आखरी वसीयतनामे में एक ऐसे महाद्वीप की स्थापना की इच्छा ज़ाहिर की, जहां के लोगों में प्रेम और सौहार्द की भावना हो| सिकंदर ने इसके लिए एशिया और यूरोप के लोगों के बीच विवाह संबंध स्थापित कर परिवार विस्तार करने का प्रस्ताव रखा था l
6. मृत्यु के 600 साल बाद भी सिकंदर की कब्र एक तीर्थ स्थल जैसी ही थी l दूर-दूर से राजा और आम लोग वहां जाते थे l जूलियस सीज़र, मार्क ऐन्टनी जैसे सूरमा भी सिकंदर की कब्र पर गए थे, पर चौथी शताब्दी की शुरुआत में सिकंदर की कब्र लापता हो गई,कैसे यह कोई नही जानता l
7. अपने पिता की मृत्यु के पश्चात सिकंदर ने राजगद्दी पाने के लिए अपने सौतेले और चचेरे भाईयों का कत्ल कर दिया और मकदूनिया का राजा बन गया।
8. फारसी साम्राज्य का राजा शाह दारा था जिसे सिकंदर ने अलग- अलग तीन युद्धों में हराकर उसके साम्राज्य को जीता। परंतु शाह दारा ने सिकंदर से संधि कर ली और अपनी एक पुत्रीऱुखसाना का विवाह उससे कर दिया।
9. भारत में सिकंदर का सामना सबसे पहले तक्षशिला के राजकुमार अंभी से हुआ था। अंभी ने शीघ्र ही आत्मसमर्पण कर दिया और सिकंदर को सहायता दी।
10. इतिहासकारों के अनुसार सिकंदर ने कभी भी उदारता नहीं दिखाई। वह एक अत्यंत अत्याचारी और शराबी व्यक्ति था। उसने अपने अनेक सहयोगियों को उनकी छोटी सी भूल के लिए तड़पा – तड़पा कर मार डाला था।
11. एक बार किसी छोटी सी बात के उसने अपने सबसे करीबी मित्र क्लीटोस को मार डाला। अपने पिता के मित्र पर्मीनियन को भी मरवा दिया। उसने अपने गुरू अरस्तू के भतीजे कलास्थनीज़ को मारने में भी संकोच नहीं किया।
तो दोस्तों मुझे विश्वास है की ये लेख आप सभी को अच्छी लगी होगी l इस लेख की कमियां भी आपको दिखी होंगी तो कृपया करके उन कमियों को कमेंट में जरुर बताएं l जिससे हम उन कमियों को दूर करके ऐसे ही बहुत सी जानकारी आप लोगों के लिए लाये l
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