महाभारत महाकाव्य है जो हमेशा उन लोगों को भी आकर्षक लोगों को रखता है l जो इसके बारे में कम जानते हैं। यह तथ्यों और ज्ञान का एक विशाल खजाना घर है और किसी के लिए सबकुछ जानना असंभव है। उन तथ्यों में से कई जो या तो चूक गए हैं या अभी भी लोगों के लिए अज्ञात हैं। आज, हम आपको महाभारत के ऐसे आश्चर्यजनक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं।
अगर आप महाभारत के सबसे रोचक तथ्य को जानना चाहते हैं तो आप इस पोस्ट को continue पढ़ते रहे l और अपनी gyan में वृद्धि करते रहे l शायद ये लेख आपके किसी काम में भी आ जाये l ये जानकारी हमने इंटरनेट से इकट्टा की है l
महाभारत से जुडी रोचक अनसुनी बाते जो आपको हैरान कर देंगी l
1. ब्रह्माजी के श्राप के कारण अगले जन्म में महाभिष, राजा प्रतीप के पुत्र शांतनु बने। इनका विवाह देवी गंगा से हुआ। विवाह से पहले गंगा ने शांतनु से यह प्रतिज्ञा करवाई थी कि वे कभी कोई प्रश्न नहीं पूछेंगे। शांतनु ने उनकी यह बात मान ली। राजा शांतनु और गंगा की आठ संतान हुई।पहली सातों संतानों को गंगा ने जन्म लेते ही नदी में प्रवाहित कर दिया। वचनबद्ध होने के कारण राजा शांतनु गंगा से कुछ नहीं पूछ पाए। जब गंगा आंठवी संतान को नदी में प्रवाहित करने जा रही थी तब राजा शांतनु ने क्रोध में आकर उससे इसका कारण पूछा। तब देवी गंगा ने उन्हें पिछले जन्म की पूरी बात बताई और वह शांतनु की आठवी संतान को लेकर अन्यत्र चली गई।
2. जन्म लेते ही दुर्योधन गधे की तरह रेंकने लगा। उसका शब्द सुनकर गधे, गीदड़, गिद्ध और कौए भी चिल्लाने लगे, आंधी चलने लगी, कई स्थानों पर आग लग गई। यह देखकर विदुर ने राजा धृतराष्ट्र से कहा कि आपका यह पुत्र निश्चित ही कुल का नाश करने वाला होगा अत: आप इस पुत्र का त्याग कर दीजिए लेकिन पुत्र स्नेह के कारण धृतराष्ट्र ऐसा नहीं कर पाए।
3. सहदेव (पानादाव भाई) भविष्य के बारे में सबकुछ जानते थे। वह युद्ध के बारे में जानता थे l लेकिन वह चुप रहा क्योंकि उसने किसी को कुछ भी बताया तो उसे मरने के लिए शाप दिया गया था।
4. द्रोणाचार्य के जन्म से एक मजेदार कहानी जुडी है l कथा के अनुसार द्रोणाचार्य के पिता महर्षि भारद्वाज थे जो एक बार नदी में स्नान कर रहे थे l तभी उन्हें घृताची नामक एक अप्सरा दिखाई दी जिन्हें देखकर वे आकर्षित हो गए l और उनके शरीर से शुक्राणु निकल गए l इन्हें भारद्वाज ने एक पात्र (द्रोण) में जमा कर दिया जिससे द्रोणाचार्य का जन्म हुआ l
5. भीष्म को पता था कि शिखंडी अतीत में एक महिला थीं जिसे अम्बा के नाम से जाना जाता था l
6. भीष्म पितामह के पिता का नाम शांतनु था, उनका पहला विवाह गंगा से हुआ था। पूर्वजन्म में शांतनु राजा महाभिष थे। उन्होंने बड़े-बड़े यज्ञ करके स्वर्ग प्राप्त किया। एक दिन बहुत से देवता और राजर्षि, जिनमें महाभिष भी थे, ब्रह्माजी की सेवा में उपस्थित थे।
उसी समय वहां देवी गंगा का आना हुआ। गंगा को देखकर राजा महाभिष मोहित हो गए और एकटक उन्हें देखने लगे। इससे क्रुद्ध होकर ब्रह्मा जी ने महाभिष को श्राप दे दिया। जब महाभिष ने उनसे क्षमा याचना की तब ब्रह्माजी ने कहा- महाभिष तुम मृत्युलोक जाओ, जिस गंगा को तुम देख रहे हो, वह तुम्हारा अप्रिय करेगी और तुम जब उस पर क्रोध करोगे तब इस शाप से मुक्त हो जाओगे।
7. क्या आप जानते है द्रोणाचार्य का वध करने वाले द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न वास्तव में एकलव्य का पुनर्जन्म थे l कहानी के अनुसार जब भगवान कृष्ण ने विवाह हेतु देवी रुक्मणी का अपहरण किया तब उनका सामना एकलव्य से हुआ l
उस समय एकलव्य जरासंध के सेनापति थे l इस युद्ध में श्री कृष्ण के हाथो एकलव्य ने वीरगति प्राप्त की l उस समय कृष्ण ने उन्हें आशीर्वाद दिया की अगले जन्म वह द्रोणाचार्य से अपना बदला ले सकेंगे l
8. राजा शांतनु का दूसरा विवाह निषाद कन्या सत्यवती से हुआ। शांतनु और सत्यवती के दो पुत्र हुए- चित्रांगद और वित्रिचवीर्य। चित्रांगद बहुत ही वीर और पराक्रमी था। एक युद्ध में उसी के नाम के गंर्धवराज चित्रांगद ने उसका वध कर दिया। चित्रांगद के बाद विचित्रवीर्य को राजा बनाया गया। इनका विवाह काशी की राजकुमारी अंबिका और अंबालिका से हुआ। लेकिन कुछ समय बाद ही वित्रिचवीर्य की मृत्यु हो गई।
9. लक्ष्मण की बहन लक्ष्मण की शादी संबा (कृष्णा के पुत्र) से हुई थी l
10. महाभारत की रचना करने वाले वेदव्यास भी महाभारत/ mahabharat का ही एक भाग थे l राजा शांतनु से शादी करने से पहले सत्यवती का ऋषि पराशर द्वारा मिलन से जन्मा एक पुत्र था l कहानी के अनुसार ऋषि पराशर सत्यवती को देखकर मन्त्र मुग्ध हो गए और उनसे मिलना की इच्छा जाहिर की l
पराशर को अनुमति देने से पहले, सत्यवती ने उनसे तीन इच्छाओं की मांग की इनमें से एक थी कि उनके संघ से जन्मा पुत्र महान ऋषि के रूप में प्रसिद्ध हो l इसके बाद सत्यवती ने यमुना में एक द्वीप पर एक पुत्र को जन्म दिया। इस पुत्र को कृष्ण द्वैपायन कहा जाता था l जो बाद में वेदव्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए – वेदों के संकलक और पुराणों और महाभारत के लेखक l
11. महाभारत काल में विमान और परमाणु अस्त्र थे ? - मोहन जोदड़ो में कुछ ऐसे कंकाल मिले थे जिसमें रेडिएशन का असर था। महाभारत में सौप्तिक पर्व के अध्याय 13 से 15 तक ब्रह्मास्त्र के परिणाम दिए गए हैं। हिंदू इतिहास के जानकारों के मुताबिक 3 नवंबर 5561 ईसापूर्व छोड़ा हुआ ब्रह्मास्त्र परमाणु बम ही था ?
12. महाभारत ग्रंथ की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी लेकिन इसका लेखन भगवान श्रीगणेश ने किया था। भगवान श्रीगणेश ने इस शर्त पर महाभारत का लेखन किया था कि महर्षि वेदव्यास बिना रुके ही लगातार इस ग्रंथ के श्लोक बोलते रहे।
तब महर्षि वेदव्यास ने भी एक शर्त रखी कि मैं भले ही बिना सोचे-समझे बोलूं लेकिन आप किसी भी श्लोक को बिना समझे लिखे नहीं। बीच-बीच में महर्षि वेदव्यास ने कुछ ऐसे श्लोक बोले जिन्हें समझने में श्रीगणेश को थोड़ा समय लगा और इस दौरान महर्षि वेदव्यास अन्य श्लोकों की रचना कर लेते थे।
13. राजा शांतनु का दूसरा विवाह निषाद कन्या सत्यवती से हुआ। शांतनु और सत्यवती के दो पुत्र हुए- चित्रांगद और वित्रिचवीर्य। चित्रांगद बहुत ही वीर और पराक्रमी था। एक युद्ध में उसी के नाम के गंर्धवराज चित्रांगद ने उसका वध कर दिया।
चित्रांगद के बाद विचित्रवीर्य को राजा बनाया गया। इनका विवाह काशी की राजकुमारी अंबिका और अंबालिका से हुआ। लेकिन कुछ समय बाद ही वित्रिचवीर्य की मृत्यु हो गई।
14. दुर्योधन मह्त्वकांशी होने के बावजूद भी अपने वचन का पक्का था l कथा के अनुसार दुर्योधन ने अपनी पत्नी भानुमती को वचन दिया था की वह कभी दूसरी शादी नहीं करेगा l उस काल में एक से ज्यादा शादी करने का प्रचलन था l इसके बावजूद दुर्योधन ने अपना वचन निभाया और कभी दूसरा विवाह नहीं किया l
15. बलराम ने मूल रूप से सुभद्रा से दुर्योधन से शादी करने की योजना बनाई थी। लेकिन सुभद्रा अर्जुन से शादी करना चाहती थीं इसलिए वह उनके साथ भाग गई l
16. धर्म ग्रंथों के अनुसार तैंतीस देवता प्रमुख माने गए हैं। इनमें अष्ट वसु भी हैं। ये ही अष्ट वसु शांतनु व गंगा के पुत्र के रूप में अवतरित हुए क्योंकि इन्हें वशिष्ठ ऋषि ने मनुष्य योनि में जन्म लेने का श्राप दिया था। गंगा ने अपने सात पुत्रों को जन्म लेते ही नदी में बहा कर उन्हें मनुष्य योनि से मुक्त कर दिया था। राजा शांतनु व गंगा का आठवां पुत्र भीष्म के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
17. बर्बरीक महान पांडव भीम के पुत्र घटोत्कच और नागकन्या अहिलवती के पुत्र थे। कहीं-कहीं पर मुर दैत्य की पुत्री ‘कामकंटकटा’ के उदर से भी इनके जन्म होने की बात कही गई है ।
महाभारत का युद्ध जब तय हो गया तो बर्बरीक ने भी युद्ध में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की और मां को हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन दिया । बर्बरीक अपने नीले रंग के घोड़े पर सवार होकर तीन बाण और धनुष के साथ कुरुक्षेत्र की रणभूमि की ओर अग्रसर हुए ।
बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरव और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। यह जानकर भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण के वेश में उनके सामने उपस्थित होकर उनसे दान में छलपूर्वक उनका शीश मांग लिया।
बर्बरीक ने कृष्ण से प्रार्थना की कि वे अंत तक युद्ध देखना चाहते हैं l तब कृष्ण ने उनकी यह बात स्वीकार कर ली। फाल्गुन मास की द्वादशी को उन्होंने अपने शीश का दान दिया।
भगवान ने उस शीश को अमृत से सींचकर सबसे ऊंची जगह पर रख दिया ताकि वे महाभारत युद्ध देख सकें। उनका सिर युद्धभूमि के समीप ही एक पहाड़ी पर रख दिया गया, जहां से बर्बरीक संपूर्ण युद्ध का जायजा ले सकते थे।
18. महाराज पाण्डु का दूसरा विवाह मद्रदेश की राजकुमारी माद्री से हुआ। एक बार राजा पाण्डु शिकार खेल रहे थे। उस समय किंदम नामक ऋषि अपनी पत्नी के साथ हिरन के रूप में सहवास कर रहे थे।
उसी अवस्था में राजा पाण्डु ने उन पर बाण चला दिए। मरने से पहले ऋषि किंदम ने राजा पाण्डु को श्राप दिया कि जब भी वे अपनी पत्नी के साथ सहवास करेंगे तो उसी अवस्था में उनकी मृत्यु हो जाएगी।
19. ऋषि किंदम के श्राप से दु:खी होकर राजा पाण्डु ने राज-पाट का त्याग कर दिया और वनवासी हो गए। कुंती और माद्री भी अपने पति के साथ ही वन में रहने लगीं। जब पाण्डु को ऋषि दुर्वासा द्वारा कुंती को दिए गए मंत्र के बारे में पता चला तो उन्होंने कुंती से धर्मराज का आवाह्न करने के लिए कहा जिसके फलस्वरूप धर्मराज युधिष्ठिर का जन्म हुआ।
इसी प्रकार वायुदेव के अंश से भीम और देवराज इंद्र के अंश से अर्जुन का जन्म हुआ। कुंती ने यह मंत्र माद्री को बताया। तब माद्री ने अश्विनकुमारों का आवाह्न किया, जिसके फलस्वरूप नकुल व सहदेव का जन्म हुआ l
20. अर्जुन की द्रौपदी के साथ अपने वैवाहिक नियमों को तोड़ने की तीर्थयात्रा ने उन्हें तीन और पत्नियां अर्जित की - चित्रांगदा (मणिपुरा), उलुपी (नागा) और सुभद्रा l
21. सभी के सभी कौरव एक जैसे थे और पांडवो के विरुद्ध थे l धृतराष्ट्र के दो पुत्र, विकर्ण और युयुत्सु ने न सिर्फ दुर्योधन के गलत कार्यों पर आपति जताई बल्कि द्रोपदी चीरहरण का भी काफी विरोश किया l ये दोनों युद्ध के पक्ष में भी नहीं थे लेकिन भाई से धोखा न कर इन्होने मज़बूरी में युद्ध किया और वीरगति प्राप्त की l
22. धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी को महर्षि वेदव्यास ने सौ पुत्रों की माता होने का वरदान दिया था । समय आने पर गांधारी को गर्भ ठहरा लेकिन वह दो वर्ष तक पेट में रुका रहा। घबराकर गांधारी ने गर्भ गिरा दिया ।
उसके पेट से लोहे के गोले के समान एक मांस पिंड निकला । तब महर्षि वेदव्यास वहां पहुंचे और उन्होंने कहा कि तुम सौ कुण्ड बनवाकर उन्हें घी से भर दो और उनकी रक्षा के लिए प्रबंध करो। इसके बाद महर्षि वेदव्यास ने गांधारी को उस मांस पिण्ड पर ठंडा जल छिड़कने के लिए कहा । जल छिड़कते ही उस मांस पिण्ड के 101 टुकड़े हो गए ।
महर्षि की आज्ञानुसार गांधारी ने उन सभी मांस पिंडों को घी से भरे कुंडों में रख दिया। फिर महर्षि ने कहा कि इन कुण्डों को दो साल के बाद खोलना। समय आने पर उन कुण्डों से पहले दुर्योधन का जन्म हुआ और उसके बाद अन्य गांधारी पुत्रों का। जिस दिन दुर्योधन का जन्म हुआ था उसी दिन भीम का भी जन्म हुआ था।
23. क्या आज भी जीवित हैं अश्वत्थामा ? - विज्ञान यह नहीं मानता कि कोई व्यक्ति हजारों वर्षों तक जीवित रह सकता है। ज्यादा से ज्यादा 150 वर्ष तक जीवित रहा जा सकता है वह भी इस शर्त पर कि आबोहवा और खानपान अच्छा हो तो। तब ऐसे में कैसे माना जा सकता है कि अश्वत्थामा जीवित होंगे।
महाभारत के युद्ध में अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया था जिसके चलते लाखों लोग मारे गए थे। अश्वत्थामा के इस कृत्य से कृष्ण क्रोधित हो गए थे और उन्होंने अश्वत्थामा को शाप दिया था कि ‘तू इतने वधों का पाप ढोता हुआ तीन हजार वर्ष तक निर्जन स्थानों में भटकेगा। तेरे शरीर से सदैव रक्त की दुर्गंध नि:सृत होती रहेगी। तू अनेक रोगों से पीड़ित रहेगा । व्यास ने श्रीकृष्ण के वचनों का अनुमोदन किया।
कहते हैं कि अश्वत्थामा इस शाप के बाद रेगिस्तानी इलाके में चला गया था और वहां रहने लगा था । कुछ लोग मानते हैं कि वह अरब चला गया था। उत्तरप्रदेश में प्रचलित मान्यता अनुसार अरब में उसने कृष्ण और पांडवों के धर्म को नष्ट करने की प्रतिज्ञा ली थी ।
24. एक बार दुर्योधन ने धोखे से भीम को विष खिलाकर गंगा नदी में फेंक दिया। बेहोशी की अवस्था में भीम बहते हुए नागलोक पहुंच गए। वहां विषैले नागों ने भीम को खूब डंसा, जिससे भीम के शरीर का जहर कम हो गया और वे होश में आ गए और नागों को पटक-पटक कर मारने लगे।
यह सुनकर नागराज वासुकि स्वयं भीम के पास आए। उनके साथी आर्यक नाग में भीमसेन को पहचान लिया। आर्यक नाग भीमसेन के नाना का नाना था। आर्यक नाग ने प्रसन्न होकर भीम को हजारों हाथियों का बल प्रदान करने वाले कुंडों का रस पिलाया, जिससे भीमसेन और भी शक्तिशाली हो गए।
25. गुरु द्रोणाचार्य का विवाह कृपाचार्य की बहन कृपी से हुआ। कृपी के गर्भ से अश्वत्थामा का जन्म हुआ। उसने जन्म लेते ही अच्चै:श्रवा अश्व के समान शब्द किया, इसी कारण उसका नाम अश्वत्थामा हुआ। वह महादेव, यम, काल और क्रोध के सम्मिलित अंश से उत्पन्न हुआ था।
26. अभिमन्यु वास्तव में कल्याण नामक एक दत्ता (राक्षस) की आत्मा थी। कल्याणाना को मारने के बाद कृष्णा ने उसके आत्मा पर कब्जा कर लिया था l और उसे केवल एक अलमारी में भरने के लिए द्वारका ले गया थे l
27. युधिष्ठिर के राज के 15 साल बाद धृतराष्ट्र और गांधीारी जंगल में चले गये । इसका मुख्य कारण भीम के ताने थे, जो उन्हें निराश करते थे ।
28. पांडु (पांडवों के पिता) ने कामना की कि उनके बेटों को मृत्यु के बाद अपना मांस खाना चाहिए ताकि सभी ज्ञान उन लोगों को स्थानांतरित कर सकें जिन्हें उन्होंने इतने सालों बाद एकत्र किया था। केवल सहदेव ने एक टुकड़ा खा लिया; जिस क्षण उसने खाया वह भविष्य को देखने में सक्षम था l
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